Thursday, 27th July, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः रंगून

25, Feb 2017 By बगुला भगत

सबसे पहले तो मैं ये बता दूं कि डायरेक्टर ने पिच्चर में ‘रंगून’ एक जगह भी नहीं दिखाया, जैसे ‘बॉर्डर’ में एलन बॉर्डर का एक भी सीन नहीं था! भाई लोग बर्मा के बॉर्डर पे ही गेम खेलते रहते हैं और पिच्चर का नाम रख दिया रंगून। यानि देसी पिच्चर को इंटरनेशनल बना दिया। ब्लडी हैल!

rangoon
कीचड़ और ‘फ्रेंच किस’ का कॉकटेल!

फ़िल्म प्रोड्यूसर बने सैफ़ अली ख़ान (रूसी बिल्लीमोरिया) इस पिच्चर में भी शादीशुदा हैं और अनमैरिड हीरोइन कंगना (जूलिया) से चक्कर चला रहे हैं और कमाल देखो! यहां भी सामने उनके कट्टर प्रतिद्वंदी शाहिद कपूर (नवाब मलिक) ही हैं। लेकिन यहां हीरोइन का झुकाव शाहिद की ओर है। वो रईस नवाब सैफ़ को ठुकराकर ग़रीब जमादार नवाब मलिक को चुन लेती है। ओह! लेकिन वो कंगना है, करीना नहीं!

तो रूसी, अंग्रेज़ जनरल के कहने पर अपनी जूलिया को हिन्दुस्तानी जवानों को एंटरटेन करने के लिये इंडिया-बर्मा के बॉर्डर पर भेज देता है (जैसे हमारे नेताजी सैफ़ई में हीरोइनें नचाकर पब्लिक का हौसला बढ़ाते हैं)। वैसे, बॉर्डर पर जाकर जूलिया को उन्हें राखी बांधनी चाहिये थी। अंग्रेज़ों के संस्कार ही गड़बड़ हैं!

ख़ैर! जनरल साब जूलिया की सेफ़्टी की ज़िम्मेदारी जमादार नवाब मलिक को सौंप देते हैं। यानि जलेबी की रखवाली कुतिया के हवाले! नवाब अमानत में ख़यानत कर देता है और जूलिया को पटा लेता है और जानबूझकर उसे बर्मा के जंगलों में घुमाता रहता है। साथ में एक जापानी सिपाही को बंधक बनाकर अपने साथ रखता है।

विशाल भारद्वाज ने इस जापानी सिपाही के साथ ऐसा बुरा सुलूक किया है, जिसकी वजह से जापान के साथ हमारे रिश्ते हमेशा के लिये ख़राब हो सकते हैं। एक तो उस बेचारे को भूखा-प्यासा रक्खा और उससे बड़ा अत्याचार ये कि वो बेचारा मजबूरी में शाहिद और कंगना की चूमा-चाटी देखता रहता है, कई दिन और कई रातों तक! ये कोई बात है भला! उस बेचारे के दिल पर क्या बीतती होगी? क्या विशाल को पता नहीं है कि फौजी भाई अंदर से कैसे भरे रहते हैं। तो उस हिसाब से तो ये उस जापानी जवान का यौन-उत्पीड़न ही हुआ ना!

वैसे, हम झूठ नहीं बोलेंगे! तीनोंं बंदों ने काम मेहनत से किया है और कंगना तो अगर सिंगिंग में भी ट्राई करे तो ‘कंगना रेशमिया’ बन सकती है- नाक से टनाटन आवाज़ आती है!

कुल मिलाकर विशाल भारद्वाज ने अपने नाम की तरह पिच्चर भी विशाल बनायी है- एकदम भव्य! लेकिन वो हमें ये बता दे कि बेचारा देसी जमादार किसी ट्रेंड अंग्रेज़ की तरह ‘फ्रेंच किस’ कैसे कर लेता है जूलिया को? वो भी आज़ादी से पहले! हमारे बड़े-बूढ़े तो बेचारे सीधे-सादे आदमी थे- बेचारे गालों की ‘पप्पी’ ही जानते थे। वैसे, कीचड़ में चुम्मे का मज़ा ही कुछ और है और इस मज़े के लिये हम रंगून को दे रहे हैं- 3 देसी किस! Kiss-3