Friday, 24th March, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः रईस

25, Jan 2017 By बगुला भगत

चेतावनीः कमज़ोर दिलवाले दारूबाज़ इस पिच्चर को ना देखें। इस पिच्चर में एक बहुत दर्दनाक सीन है। इस सीन में एसीपी बने नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी दारू की लाखों बोतलों पे रोड-रोलर चला देते हैं। इत्ती बोतलें…हे भगवान! सारी ज़िंदगी बैठ के पीते।

पिच्चर में नवाज़ुद्दीन का नाम है- जयदीप अंबालाल मजमूदार! इत्ती तो भाईसाब की लंबाई भी नहीं है, जित्ता लंबा नाम है। इत्ते लंबे नाम वाले का तो आधार कार्ड भी नहीं बनता।

वैसे भाई, एक्टिंग अपनी जगह है और पुलिस डिपार्टमेंट के नियम-क़ायदे अपनी जगह। इस पिच्चर का डायरेक्टर राहुल ढोलकिया हमें बताये कि इत्ता मरियल एसपी होता कहीं! डायरेक्शन से पहले कहीं ढोलक बजाते थे क्या ढोलकिया भैय्या? इत्ती कम हाइट वाले बंदे को पुलिस में भर्ती कैसे करवा दिया। हैं?

Raees
अपनी बोतलों की रखवाली करता रईस

तो जी, पिच्चर की कहानी भी सुन लो। अवैध शराब के धंधे पे है। कहानी ये है कि एक बित्ते भर का लौंडा रईस आलम (शाहरुख़ ख़ान) दारू की बोतलों की तस्करी करता है और उसकी माँ उसे समझाने के बजाय उससे कहती है कि ‘कोई धंधा छोटा नहीं होता।’ वो एक बार भी उसके कान पे चमाट मार के ये नहीं कहती कि “बेटा कहीं फल-फ्रूट की ठेली ही लगा ले!”

जब अम्मी से ही बढ़ावा मिलता है तो वो बड़ा वाला शराब माफ़िया बन जाता है, जिसके पीछे एसीपी मजमूदार (नवाज़ुद्दीन) चाय पीकर पड़ा हुआ है। बस फिर पूरी पिच्चर में ट्रक पकड़े जाते रहते हैं और ‘माल’ ज़ब्त होता रहता है। बेचारे दर्शक पूरी पिच्चर में बोतलें फूटती देखते रहते हैं।

और हां! बीच-बीच में रईस आसिया (माहिरा ख़ान) से इश्क़ भी लड़ाता रहता है और नाचता-गाता भी रहता है। पाकिस्तान से इंपोर्ट हुई माहिरा की एक्टिंग देख के तो लग रहा है कि शाहरुख़ ने उसे कंट्रोवर्सी के लिये ही लिया था। नहीं तो माहिरा जैसी तो हमारे यहीं पचासों पड़ी हैं। सच्ची में!

पिच्चर में रईस ने आंखों में इत्ता सुरमा डाला है कि बस पूछो मत! शायद वो विदेशी कंपनियों का केमिकल-युक्त हानिकारक सुरमा था, तभी तो चश्मे लग गये। अगर बाबा रामदेव का शुद्ध पतंजलि सुरमा लगाते तो आंखें चकाचक होतीं और धंधा भी टनाटन चलता।

पिच्चर के प्रमोशन के लिये ट्रेन में सफ़र करता देखकर हम ये तो मान गये कि शाहरुख़ में बनिये का दिमाग़ है। लेकिन मियाँभाई की डेयरिंग का पता नहीं! अगर वो होती तो राज ठाकरे की चौखट पे ऐसे माथा ना रगड़ते भाई मियाँ।

वैसे, शाहरुख़ ने मुंह बिगाड़-बिगाड़ के एक्टिंग करके पुराने दिनों की याद दिला दी। औरों पे तो ऐसी भी नहीं आती! और नवाज़? उसे नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी कह लो या एक्टिंग सिद्दीक़ी, बात एक ही है!

तो दारू के धंधे वाले ‘रईस’ को हमारी तरफ़ से मिलते हैं तीन पव्वे! सबूत लाईये, ले जाईये…पव्वे हाज़िर हैं-

Daaru