Thursday, 23rd March, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः ओके जानू

13, Jan 2017 By बगुला भगत

‘ओके जानू’ देखकर लगता है जैसे शाद अली ने फ़ेसबुक पर अपलोड करने वाले वीडियो को ग़लती से सिनेमाघरों में रिलीज कर दिया। शाद बॉलीवुड के अकेले ऐसे डायरेक्टर हैं, जिनका लेवल हर फ़िल्म के साथ गिरता जा रहा है। सोचो! बंदे ने ‘साथिया’ से डेब्यू किया, उसके ‘बंटी और बबली’, उसके बाद ‘झूम बराबर झूम’, फिर ‘किल दिल’ और अब ‘ओके जानू!’ कहां जाकर रुकोगे शाद जानू?

okjaanu1
ओके जानू में एक बार फिर मिलते लड़का-लड़की

तो जी फिलिम की कहानी (अगर आप उसे कहानी मानेें तो!) ये है कि ‘आदमी-औरत टाइप’ के लड़का-लड़की मिलते हैं…फिर मिलते हैं…एक बार फिर मिलते हैं…उसके बाद एक बार और मिलते हैं। और मिलते-मिलते फ़िल्म ख़त्म हो जाती है। सच में! ओह सॉरी! एक चीज़ और होती है फ़िल्म में! लास्ट सीन में वे शादी कर लेते हैं। बस यही स्टोरी है। इसी मिलने-मिलाने को सवा दो घंटे तक खींचा गया है।

आदि (आदित्य राय कपूर) वीडियो गेम डेवलपर है, जो…एक मिनट…एक मिनट! फिर से ‘आदि’? इन बॉलीवुड वालों को कोई और नाम नहीं मिलता क्या? पहले हर फ़िल्म में ‘रवि’ और ‘विजय’ हुआ करते थे और अब ये आदि! पिछले 5-6 सालों में इतने ‘आदि’ पैदा हो चुके हैं, लगता है जैसे हम ‘आदि-काल’ में जी रहे हैं। इस नाम पर रोक लगाने के लिये मोदी सरकार को अब अध्यादेश ही लाना पड़ेगा शायद!

तो ख़ैर! आदि एक वीडियो गेम डेवलपर है, जो अमेरिका जाना चाहता है। तारा (श्रद्धा कपूर) आर्किटेक्ट है, जो पेरिस जाने वाली है। तो दोनों विदेश जाने से पहले एक-दूसरे को चेक करने के लिये लिव-इन में रहने लगते हैं। मुझे बताओ, मुंबई में ऐसे कौन से बुड्ढे-बुढ़िया हैं, जो किसी छड़े को 6 महीने तक अपने महल जैसे घर में फ्री में रहने देंगे और वो भी गर्लफ्रेंड के साथ! नहीं, बताओ मुझे! और वो भी तब, जबकि वो बुड्ढा रिटायर्ड जज हो, कोई कलाकार टाइप चू#@$ आदमी नहीं!

इस घिसे-पिटे फ़ॉर्मूले पर अनगिनत फ़िल्में बन चुकी हैं लेकिन इतनी सपाट और नीरस फ़िल्म शायद ही बनी हो! बार-बार यंग कपल्स को कन्फ़्यूज्ड दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तव में कन्फ्यूज्ड ये हमारे करण जौहरें और आदित्य चोपड़ाएं हैं, जो उन्हें लल्लू और कन्फ़्यूज्ड समझ रहे हैं।

आदित्य राय कपूर और श्रद्धा कपूर के बीच में केमिस्ट्री कह लो या फ़िजिक्स लेकिन उसमें मज़ा बिल्कुल नहीं आया। वे जो भी करते हैं, सब नकली-नकली सा लगता है।

अगर आपको लोगों के वो फ़ोटोज अच्छे लगते हैं, जिन्हें वे फ़ेसबुक और व्हॉट्सएप पर ठेलते रहते हैं, तो जाकर ‘ओके जानू’ के फ़ोटोज भी देख आईये। लेकिन बाद में हमसे मत कहना कि बताया नहीं था। तो हमारी तरफ़ से ओके जानू को मिलते हैं चार बैंगन.Baingan



ऐसी अन्य ख़बरें