Tuesday, 24th October, 2017

चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः काबिल

26, Jan 2017 By बगुला भगत

‘काबिल’ के पोस्टर पे लिखा है The Mind Sees All, इसका मतलब है कि पिच्चर के डायरेक्टर संजय गुप्ता का माइंड सारी कोरियन फ़िल्मों की डीवीडी देखता रहता है।

Kaabil
हमारे गुप्ता जी बहुत काबिल हैं

असल में, गुप्ता जी को अपनी बुआ के लड़के के साथ प्लास्टिक की कुर्सी बनाने की फैक्ट्री खोलनी थी। लेकिन उन्होंने प्लास्टिक की पिच्चर बनाने की फैक्ट्री खोल ली, जिनका सारा कच्चा माल फॉरेन से आता है। आजकल साउथ कोरिया से ज़्यादा इंपोर्ट कर रहे हैं गुप्ताजी! इसलिये अनुराग कश्यप को नॉर्थ कोरिया भेजने से पहले गुप्ता जी को साउथ कोरिया भेजो। ताकि ये वहीं बस जायें और किसी कोरियन डायरेक्टर के असिस्टेंट बन जायें।

कहानी (जिसमें साउथ कोरिया के साथ-साथ अमरीका का भी माल लगा है) ये है कि रोहन भटनागर (ऋतिक रोशन) और सुप्रिया शर्मा (यामी गौतम) दोनों दृष्टिहीन हैं। पांच मिनट के अंदर दोनों में मुलाकात, प्यार और शादी हो जाती है। एक नेता (रोनित रॉय) का बिगड़ैल भाई (रोहित रॉय) अपने दोस्त के साथ सुप्रिया का बलात्कार करता है। फिर रोहन उन सबको मारकर बदला लेता है।

पिच्चर देखकर लगता है कि इसमें ऋतिक ही अकेले काबिल हैं, बाक़ी सब नाकाबिल हैं। वैसे, किसी पिच्चर में ऋतिक हों (चाहे दृष्टिहीन ही क्यों ना हो) और वो डांस ना करें, ऐसा कभी हो सकता है भला! तो इसमें भी उनका एक ज़बरदस्त डांस नंबर है।

भई, गुप्ता जी की पिच्चर में और कुछ हो ना हो पर ‘स्टाइल’ में जान फाड़ देते हैं गुप्ता जी! किरदारों को दृष्टिहीन दिखाने का उनका सिंपल सा फंडा है- सामने वाले के लेफ़्ट या राइट में देखकर बात करो और बन गये दृष्टिहीन। ट्रेलर देखकर तो पता ही नहीं चला था पिच्चर में यामी भी दृष्टिहीन बनी है।

पिच्चर में एक सीन है, जिसमें रोहन का दोस्त सुप्रिया को देखकर बोलता है- “यार, ये तो तुझसे भी ज़्यादा गोरी है! तुम दोनों के बच्चे तो बिल्कुल अंग्रेज़ लगेंगे।” हम गुप्ता जी से पूछते है कि अगर उनके हीरो-हीरोइन सांवले होते तो क्या वो दोस्त ये कहता- “यार, ये तो तुझसे भी काली है! तुम दोनों के बच्चे तो बिल्कुल अफ्रीकी लगेंगे।”

तो ‘स्टाइल’ वाले गुप्ता जी को हमारी तरफ़ से कोरियन पिच्चरों की दो डीवीडी!DVD3