Saturday, 16th December, 2017

चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः जॉली एलएलएलबी-2

10, Feb 2017 By बगुला भगत

(डिस्क्लेमरः हमारे इस रिव्यू का किसी भी जीवित या मृत वकील या जज से कोई संबंध नहीं है। अगर उनसे कोई समानता पायी जाती है, तो वो महज एक इत्तेफ़ाक होगा। इसके लिये हम एडवांस में ‘सॉरी’ बोलते हैं।)

रिव्यू करते टाइम ये डिस्क्लेमर हम अपनी भलाई के लिये दे रहे हैं भाईसाब! नहीं तो कोई वकील या जज हमारे ख़िलाफ़ ऐसी जगह केस डालेगा कि फ़ेकिंग न्यूज वालों की ज़िंदगी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने में ही बीत जायेगी। फिर आप हमारे आर्टिकल्स का वैसे ही इंतज़ार करते रह जाओगे, जैसे इस देश की पब्लिक अपने केस के फ़ैसले का करती है।

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दिल्ली से लखनऊ जाते जॉली भाईसाब

तो जी, हमारे क्लाइन्ट पाठक भाईयो-बहनो! पिच्चर में अपना कनपुरिया भाई जगदीश्वर मिश्रा उर्फ़ जॉली (अक्षय कुमार) लखनऊ में वकालत करता है। एक्चुअली, वो वकालत-पकालत कुछ नहीं करता, बल्कि एक मशहूर वकील रिज़वी (रामगोपाल बजाज) का 15वां असिस्टेंट है और ताश खेलकर टाइम पास करता रहता है। बड़ा बनने के लिये जॉली को अपना चैंबर चाहिये। इसके लिये वो एक लाचार महिला से केस लड़ने के नाम पर पैसे ऐंठ लेता है, जिसके पति को पुलिस ने फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मार दिया है। जॉली की धोख़ाधड़ी का पता चलने पर वो ख़ुदकुशी कर लेती है। बस, यहीं से अपना जॉली बदल जाता है।

ये पिच्चर वहीं तक सच्ची लगती है, जहां तक जॉली खाली बैठा ताश खेलता रहता है, झूठ बोलकर केस हथियाने के चक्कर में लगा रहता है। मुसीबत में पड़ी विधवा के पैसे हड़प लेता है। उसके बाद पिच्चर फिक्शनल हो जाती है, जब जॉली का जमीर जाग जाता है और वो सच्चाई के लिये लड़ने लगता है। अपने कानपुर-लखनऊ में ऐसा नहीं होता भाईसाब! यक़ीन ना हो तो वहां जाओ और कोई केस लड़कर देखो!

पिच्चर की पहली मज़ेदार बात! जॉली की वाइफ़ पुष्पा पांडे (हुमा क़ुरैशी) जॉली से मांगती रहती है गुच्ची की ड्रेस और वो वो ख़ुद पहनता है डॉलर बिग बॉस बनियान! इस ‘डॉलर’ बनियान को दिखाने के लिये प्रोड्यूसर ने जॉली भाई से फालतू में नदी में छलाँग भी लगवा दी है। क्या बतायें! पैसों के लिये तो ये प्रोड्यूसर जी कहीं भी छलांग लगवा देंगे।

दूसरी मज़ेदार बात! जॉली पुष्पा को छुपकर व्हिस्की पिलाता है लेकिन होली पर वो खुलेआम पीती है, पीकर नाचती-गाती है। और ये जो होली का गाना है ना, ये शायद बॉलीवुड की हिस्ट्री का सबसे बकवास ‘होली सॉन्ग’ है। और तीसरी मज़ेदार बात! जॉली का बेटा बड़ा होकर नितिन गडकरी बनेगा क्योंकि जॉली अभी से उस पर पौधे पे धार लगवा रहा है।

एक्टिंग की बात करें तो- अक्षय ने बढ़िया काम किया है लेकिन फिर भी वो अरशद वारसी जैसे लल्लू और भोले नहीं लग पाते। सौरभ शुक्ला पहले पार्ट की तरह पिच्चर की जान हैं। अन्नू कपूर उतने वज़नदार नहीं हैं, जितने बोमन ईरानी। पिच्चर में एक भी कोरियोग्राफ़र की ज़रूरत नहीं थी, फ़ालतू में 3-3 रख लिये कपूर साब ने! चार-चार लोगों ने मिलकर गाने लिखे हैं और चार-चार लोगों ने ही म्यूजिक दिया है। बहुत नाइंसाफ़ी है जज साहब!

कुल मिलाकर, ये थोड़ी देर तक ही ‘जॉली’ लगती है, उसके बाद ‘स्पेशल 26’ बन जाती है लेकिन बांधे रखती है। इसलिये हमारा फ़ैसला जॉली के हक़ में जाता है और फ़ेकिंग न्यूज़ की अदालत उसे बाइज़्ज़त बरी करती है और दर्शकों को पिच्चर देखने का आदेश देती है। तो चलो जाओ…देख के आओ!