Thursday, 19th January, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः 'दंगल'- आमिर तैने तो लट्ठ गाड़ दिया भाई!

22, Dec 2016 By बगुला भगत

कुछ दिन पहले अपने सल्लू भाई पहलवान बने थे और अब बने हैं आमिर! तब सल्लू की पहलवानी को देखकर मुंह से निकला था- ‘जब अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान’ और अब ‘दंगल’ में आमिर को देखकर निकला- शाब्बास छोरे…तैने तो लट्ठ गाड़ दिया!

Dangal
आमिर के कानों से डरकर फ़ोटो खिंचवातीं गीता और बबीता

भाई, स्टोरी-विस्टोरी की बात बाद में, पहले बात नोटों की! पूरी फिलिम में मेरा ध्यान तो सौ-सौ के उन नोटों पे था, जिन्हें गीता और बबीता ईनाम में जीत रही थीं। ऐसा मन कर था कि स्क्रीन में घुस जाऊं और सारे नोट उठा लूं। शर्त लगा के कह रहा हूं, अगर अभी भी कुश्ती जीतने पे सौ-सौ के नोट मिलते हों, तो आधा इंडिया आज से ही पहलवानी शुरु कर देगा। बाई गॉड!

अब बात स्टोरी की! पर स्टोरी तो आप ऑलरेडी जानते ही हो, मैं क्या बताऊं! महावीर सिंह फोगाट (आमिर) कुश्ती में ख़ुद इंटरनेशल लेवल पर मेडल नहीं जीत पाता तो ज़बरदस्ती अपनी बेटियों को कुश्ती सिखाता है और उनसे वो मेडल जितवाता है। इस सिखाने और जिताने की स्टोरी में इमोशन है, ड्रामा है, ट्रेजेडी है…सब कुछ जबरदस्त है…एकदम फस-किलास!

लेकिन ज़बरदस्ती हमेशा गोल्ड नहीं दिलाती भाईसाब! ज़बरदस्ती मेहनत तो सोनिया मैडम भी अपने बेटे से कई सालों से करवा रही हैं पर क्या जीता उसने? जो मैडम जी ने जीत रक्खा था, उसे भी हारता जा रहा है बेचारा! और अपने बच्चन साब भी कितने सालों से अपने लाड़ले को ज़बरदस्ती एक्टिंग सिखा रहे हैं, ऐश के अलावा उसने भी क्या जीता है आज तक? बोलो!

सच्ची बात तो ये है कि आमिर के कान इतने बड़े हैं कि उनसे गीता और बबीता तो क्या पूरा हरियाणा डर जाता! एक तो भाईसाब के कान पहले ही बहुत बड़े थे और अब पहलवानों की तरह टूटकर और भी डरावने हो गये, जैसे ट्रैक्टर की हेडलाइट!

आमिर की होड़ में सारे एक्टरों ने अच्छी एक्टिंग की हैं, नकलची कहीं के! चाहे वो महावीर की पत्नी के रोल में साक्षी तंवर हो या गीता और बबीता के रोल में फ़ातिमा सना शेख़ और तान्या मल्होत्रा (बचपन की भूमिका- ज़ायरा वसीम और सुहानी भटनागर) हों, या महावीर के भतीजे के रोल में अपारशक्ति खुर्राना और ऋत्विक सहोर, सबने अच्छी एक्टिंग करके दिखाई है। लेकिन इसमें कौन सी बड़ी बात है! आमिर की देखा-देखी तो कोई भी एक्टिंग कर लेगा, हमारे सल्लू भाई के सामने करके दिखायें, हम तो तब जाणैं!

वैसे, आमिर ने फिलिम में एक बात ठीक नहीं की! दंगल के टाइटल के लिये फिलिम की स्टार्टिंग में पुनीत इस्सर को तो धन्यवाद दे दिया पर शीला दीक्षित के लिये एक शब्द नहीं कहा, जिनके राज में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे। अगर शीला आंटी ने वो गेम्स ना कराये होते तो गीता और बबीता कभी मेडल ना जीत पातीं और दंगल भी कभी ना बन पाती। तो अब शीला आंटी को ‘थैंक्स’ के साथ ‘सॉरी’ भी बोलो…चलो!

ख़ैर, तुम चाहे शीला आंटी को कहो ना कहो पर हम कह रहे हैं तुम्हें- शाब्बाश! और तुम्हारे इस ‘दंगल’ से ख़ुश होकै हम दे रहे हैं 4 गोल्ड मैडल!

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