Sunday, 28th May, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः कमांडो-2

03, Mar 2017 By बगुला भगत

मुबारक़ हो…मुबारक़ हो! विदेशों से सारा काला धन आ गया और हर किसान के बैंक अकाउंट में 15-15 लाख रुपये भी डल गये और रोते-कलपते किसान हंसने लगे। अबकी बार…काले धन पे कर दिया वार! धन्यवाद…बार-बार!

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मेडिकल स्टोर से कैप्सूल लाने के लिये भागता कमांडो

डायरेक्टर देवेन भोजानी और प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने नोटबंदी की तारीफ़ करते हुए ये अजीबो-ग़रीब पिच्चर बनाई और ब्लैक मनी लाने का प्रधानमंत्री मोदी का मिशन पूरा कर दिया।

दोस्तो, डॉक्टर संत गुरमीत राम रहीम जी की पिच्चरों के बाद अगर किसी पिच्चर का नंबर आता है तो इस कमांडो का ही आता है! पहली-पहली बार डायरेक्टर बने भोजानी की पहचान एक कॉमेडी एक्टर की है और उन्होंने अपने नाम के हिसाब से सचमुच कॉमेडी पिच्चर बनायी है लेकिन एक अलग स्टाइल में! वैसे, अगर वो चाहते तो पूरी पिच्चर में सिर्फ़ अपना एक फ़ोटो भी दिखा सकते थे। उसे देखकर भी इतनी ही हंसी आती।

कहानी के नाम पे जो है वो ये है- करण (विद्युत जामवाल) स्पेशल कमांडो है, जो ब्लैक मनी को भारत से बाहर ले जाने वाले सबसे बड़े दलाल विक्की चड्ढा को पकड़ने मलेशिया जाता है। उसके साथ पुलिस इंस्पेक्टर भावना रेड्डी (अदा शर्मा) और एसीपी बख़्तावर (फ्रैडी दारुवाला) भी हैं। वहां विक्की की पत्नी मारिया (ईशा गुप्ता) उसे मारकर ख़ुद को विक्की घोषित कर देती है। यानि मारिया ही विक्की है और गंगाधर ही शक्तिमान है! फिर ये फ़ीमेल विक्की सारा ब्लैक मनी (एक लाख करोड़ रुपया!) किसी अज्ञात अकाउंट में ट्रांसफ़र कर देती है लेकिन हमारा कमांडो चमत्कारिक चालाकी से उसे ग़रीब किसानों के अकाउंट में ट्रांसफ़र कर देता है। वाह-वाह…तालियाँ…तालियाँ!

जैसा कमांडो इस पिच्चर में है, अगर ऐसे कमांडो होने लगे तो फिर देश का भगवान ही मालिक है। इस ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो…मेरा मतलब इस कमांडो की ज़ुल्फ़ें इतनी बड़ी-बड़ी हैं कि सारा टाइम उसकी आंखों पे गिरती रहती हैं, पता नहीं, उसे दिखता कैसे होगा। और वो इंस्पेक्टर रेड्डी। अईय्यो…अम्मा! वो हाई हील की उन सैंडल्स को पहनकर ख़तरनाक मिशन पर निकलती है, जिन्हें पहनकर वो एक क़दम भी ढंग से नहीं चल पाती। हमारे हीरो और विलेन पिच्चर में जब चाहते हैं, एक दूसरे के सामने आ जाते हैं, दो-चार डायलॉग मारते हैं और गोली चलाकर चले जाते हैं। नेक्स्ट मीटिंग के लिये! वाह…वाह!

ज़्यादातर एक्शन सीन्स में विद्युत जमवाल के स्टंट्स ऐसे हैं, जैसे बच्चे स्कूल के स्पोर्ट्स डे में जूडो-कराटे दिखाते हुए टाइल्स तोड़ते हैं और आग के गोले में से निकलते हैं। और डॉयलॉग इतने फ़नी हैं कि उनकी टक्कर भी बाबा राम रहीम जी की पिच्चर ही ले सकती है।

पिच्चर के शुरु में हमारा कमांडो एक बंदे से कहता है- “मैं दो वर्ड बोलूंगा। बाक़ी की कहानी तुम सुनाओगे।” तो हम भी कमांडो-2 के लिये सिर्फ़ दो वर्ड बोलते हैं- एकदम बकवास! और उसे देते हैं- चिल्ड्रेन्स बैंक ऑफ़ इंडिया का 2000 का फटा हुआ नोट- इस चाइल्डिश कमांडो का दिल रखने के लिये!fake-note-2000