Sunday, 25th February, 2018

चलते चलते

आईपीएल की तर्ज़ पर होगी इंजीनियर्स की भी नीलामी, बेस प्राइस होगा 2000 के सोडेक्सो कूपन

31, Jan 2018 By Guest Patrakar

बंगलुरू. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि पॉलिटिक्स हर चीज़ में है- आपकी पैंट में, आपकी शर्ट में! पॉलिटिक्स का तो पता नहीं लेकिन क्रिकेट इंडिया की लगभग हर चीज़ में है। जिसका सबूत हमें बंगलुरू की सॉफ़्टवेयर कम्पनीज़ ने दे दिया, जब उन्होंने IPL की तर्ज़ पर इंजीनियर्स को ख़रीदने के लिए नीलामी रखी। यह ‘ऑक्शन कैम्पस ड्राइव’ 13 फ़रवरी से लेकर 15 फ़रवरी तक चलेगी।

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सोडेक्सो के लिए मरे जा रहे 3 इडियट इंजीनियर

दरअसल, हर साल लाखों बल्कि करोड़ों लोग इंजीनियर बनते और नौकरी ढूँढते हैं। ऐसे में कौन बंदा किस कम्पनी के लिए काम करेगा, इसका फ़ैसला करना बहुत मुश्किल होता है। बस इसी दुविधा को दूर करने के लिए सॉफ़्टवेयर कम्पनियों ने भी सभी इंजीनियरों को ऑक्शन में उतारने का निर्णय लिया है। देश के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों ने इस फ़ैसले का न केवल स्वागत किया है बल्कि इसे ‘क्रांति’ बताया है।

हमने इस ऑक्शन को करा रहे ऑक्शनर महेश चपराना से बात की, जो कई सालों से भारत में ऑक्शंस करा रहे हैं। महेश ने बताया, “आज कल बेस्ट हासिल करने की भाग-दौड़ में हर किसी को बेस्ट मिलना मुश्किल हो गया है और इंजीनियर तो कभी वैसे भी बेस्ट नहीं मिल पाता। बस इसी चीज़ को देखते हुए कम्पनियों ने यह निर्णय लिया है कि वे हर इंजीनियर को नीलामी में उतारेंगी और जो उनका उचित भाव देगा वो इंजीनियर उस कम्पनी के लिए काम करेगा। यह आइडिया उन्हें IPL की नीलामी को देख के आया है।”

“लेकिन IPL की तरह इसमें इंजीनियर महँगे नहीं बिकेंगे। उन्होंने हर इंजीनियर के अनुभव को देखते हए उसका बेस प्राइस तय किया है। जिसमें सबसे ज़्यादा बेस प्राइस दो हज़ार रुपये रखा है, जिसका भुगतान ‘सोडेक्सो’ द्वारा किया जाएगा। इतना कम बेस प्राइस इसलिए रखा है ताकि किसी भी इंजीनियर को महँगा पैकेज ना मिल पाये और वो अमीर ना बन जाए क्योंकि कंपनियों का मानना है कि वो इंजीनियर ही क्या जो ग़रीब ना हो!”

हमने इस बारे में एक ग़रीब इंजीनियर राजू से भी बात की, जो ख़ुद इस नीलामी का हिस्सा होने वाले हैं। उन्होंने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मैं इस ऑक्शन का हिस्सा हूँ, जो 13 फ़रवरी से 15 फ़रवरी तक चलेगी। इस वजह से मैं और मेरे जैसे कई इंजीनियर ‘वैलेंटाइन्स डे’ की बेइज़्ज़ती से बच जाएँगे। दूसरा, नीलामी की वजह से हमें बढ़ी हुई सैलरी भी मिल सकती है। जिसके चाँस वैसे तो काफ़ी कम हैं लेकिन फिर भी रिस्क लेने में क्या जाता है!”

वैसे, ऐसा पहली बार हो रहा है कि क्रिकेटर्स या फ़ुटबॉलर्स के अलावा किसी इंसान की इस तरह ‘खुली नीलामी’ हो रही है। वरना इससे पहले इंसान केवल बंद कमरों के पीछे ही नीलाम होते देखे गये हैं। ऐसे में यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि इस नीलामी में सबसे महँगा कौन सा इंजीनियर बिकता है- कम्प्यूटर साइंस वाला, मैकेनिकल वाला या सिविल वाला?



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