Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

एयरपोर्ट पर सैंडविच और वाटर-बॉटल खरीदने के लिए प्रॉपर्टी के पेपर गिरवी रखना होगा अनिवार्य

11, May 2017 By Pagla Ghoda

मुंबई. जी हाँ! एयरपोर्ट पर खाने पीने में अपनी ज़िन्दगी भर की गाढ़ी जमा पूँजी लुटाने वाले लोग अब हो जाएँ सावधान! चूंकि एयरपोर्ट की किसी भी शॉप पर कुछ भी खरीदने से पहले अब ग्राहक के फाइनेंशियल स्टेटस यानी के ‘आर्थिक औकात’ की जांच की जा सकती है। अखिल भारतीय एयरपोर्ट कॉफ़ी शॉप एसोसिएशन (अक्षय) ने इस मामले में सरकार से पॉलिसी संबंधित बदलाव करने की अपील की है। फ़ेकिंग न्यूज़ ने इस विषय में ‘अक्षय’ के चेयरमैन श्री नच्छेतर सिंह बरगंडी जी से साक्षात् बातचीत की-

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अगर यहां जाना है तो प्रॉपर्टी के पेपर साथ ले जायें

रिपोर्टर: नमस्कार नच्छेतर पाजी।

नच्छेतर सिंह बरगंडी: ओ जियुंदा रह पुत्तर! कुछ कोल्ड्रिंक शोल्ड्रिंक पियेगा?

रिपोर्टर: नहीं पाजी, बस नाश्ता करके ही आया हूँ।

नच्छेतर पाजी: ले ये एक गिलास पानी तो पी ले।

रिपोर्टर: धन्यवाद! अच्छा पाजी, मुद्दे पे आते हैं। ये सब एयरपोर्ट पे सैंडविच खाने पे ज़मीन-जायदाद के कागज़ात क्यों दिखाने पड़ेंगे? ये बात थोड़ी सर के ऊपर से निकल गयी, ज़रा समझायेंगे?

नच्छेतर पाजी: पुत्तर तूने कभी हवाई जहाज़ से सफर नहीं किया ना?

रिपोर्टर: नहीं पाजी, मैं तो ट्रेन से ही जाता हूँ सब जगह, वो भी गरीब रथ ही लेता हूँ।

नच्छेतर पाजी: वही न, बेटे तुझे एयरपोर्ट पे मिलने वाली खाने-पीने की चीज़ों के ना दाम नहीं पता ना अभी। छोटे से छोटा खीरे और टमाटर वाला सैंडविच कम से कम ढाई सौ रुपये का आता है। छोटी वाली पचास एमएल की पानी की बोत्तल सत्तर रुपये की और बड़ी वाली एक सौ तीस रुपये की आती है। और अगर इलेक्ट्रोलाइट या फ्लेवर्ड वाटर है तो उसका अलग प्रीमियम चार्ज है। सस्ती से सस्ती छोटे कप वाली कॉफ़ी भी सौ का आंकड़ा पार कर जाती है, और उसमें अगर चोको या हेज़लनट फ्लेवर डलवायें तो एक-एक फ्लेवर तीस-तीस रुपये का पड़ता है। छोटा वाला कच्चा पिज़्ज़ा अगर ताज़ा हो तो डेढ़-सौ का और अगर बासी हो तो सौ में भी निकाल देते हैं। और इसके ऊपर अगर बीवी-बच्चे के बहकाने पे कॉफ़ी शॉप में मिलने वाले मार्बल केक या चोको चिप केक तूने ले लिए ना पुत्तर, तो फिर बैंक लोन के लिए भी अप्लाई कर दियो साथ में, क्योंकि वहां मामला हज़ारों में पहुँच जाता है। और मजे की बात ये कि इस सबमें मैंने अभी सर्विस चार्ज, सर्विस टैक्स और वैट नहीं जोड़ा है।

रिपोर्टर: ओह तो यानी कि ये सिंपल खाने की चीज़ें भी इतनी महंगी हैं, इसलिए आप बेचने से पहले ही जान लेना चाहते हैं कि ग्राहक ये सब अफ़ोर्ड कर भी पायेगा कि नहीं?

नच्छेतर पाजी: और क्या! चेक करना पड़ेगा भाई, नहीं तो बड़े ख़राब किस्से हो जाते हैं जी। लोग तैश में आके महंगा खाना खरीद लेते हैं, बाद में उनकी पतलून की जेबें फटी हुई मिलती हैं, नुकसान तो व्यापारी का ही होता है ना! अभी परसों ही एक सिंपल सी दिखने वाली फैमिली एयरपोर्ट की कॉफ़ी शॉप पे आयी, शुरू में उन्होंने मेनू कार्ड देख के सिर्फ एक सैंडविच और एक कॉफ़ी मंगवाई। लेकिन अब मियां-बीवी और दो बच्चों में इतने से क्या काम चलता। फिर क्या! केक, पेस्ट्री, डोनट, पेपरमिंट, हॉट चॉकलेट विद हेज़लनट फ्लेवर, जाने क्या-क्या मंगा बैठे। बाद में जब पौने-पांच हज़ार का बिल आया तो पति साहब के हाथ पांव फूल गए। उनका डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन बार-बार फेल हो रहा था। कैश था नहीं जेब में। भला हो उनकी खुद्दार पत्नी का, उसने अपने हाथ का सोने का कंगन उतार के काउंटर पे रख दिया और बोली- ‘हमारे हसबैंड की बेज्जती मत करिये, ये गिरवी रख के पर्ची दे दीजिये। हमारा उधार समझ लीजिये अगली बार हम एयरपोर्ट आएंगे तो ब्याज समेत बिल के पैसे चुका करके ये कंगन वापिस ले जायेंगे।’ -सीन इमोशनल हो रहा था, बच्चे रो से रहे थे, तो मैंने कैसे न कैसे बीच-बचाव करके उनका नाम पता नोट करके जाने दिया कि कोई नहीं आप घर जा के वायर ट्रांसफर कर देना पैसे!”

रिपोर्टर: हम्म काफी सीरियस बात है ये तो!

नच्छेतर पाजी: वो तो है। इसीलिए जायदाद के कागज़ात चेक करने पड़ते हैं।

रिपोर्टर: लेकिन मान लो किसी के पास घर ही नहीं है, किराये पे रहता है, तो वो कैसे दिखायेगा जायदाद के कागज़ात?

नच्छेतर पाजी: पुत्तर उसके लिए दूसरे उपाय हैं। अगर घर की सेल डीड नहीं है, तो अपना इनकम प्रूफ दिखा दो। लास्ट छह महीने की बैंक स्टेटमेंट, पिछले तीन साल की आईटीआर, पैन कार्ड की ज़ेरोक्स और पिछले दो साल का फॉर्म-सिक्सटीन। ये सब दिखा दो, आपको आपका सैंडविच और कॉफ़ी मिल जायेगा। पूरी लिस्ट है डाक्यूमेंट्स की, मैं आपको ईमेल करवा दूंगा, आप छाप देना।

रिपोर्टर: लेकिन पाजी इस सब से अच्छा सिबिल स्कोर चेक कर लीजिये।

नच्छेतर पाजी: उनसे भी चल रही है बात, अगला स्टेप वही है, सीम-लेस काम हो जायेगा।

रिपोर्टर: अच्छा पाजी चलता हूँ। आपसे बात करके अच्छा लगा।

नच्छेतर पाजी: बहुत बढ़िया लगा मुझे भी। अच्छा दो सौ चालीस रुपये बाहर काउंटर पे पकड़ा देना और रसीद ले लेना।

रिपोर्टर: दो सौ चालीस रुपये? किस बात के पाजी?

नच्छेतर पाजी: अभी आपको जी पानी पिलाया ना, उसके!

रिपोर्टर: एक गिलास पानी के दो सौ चालीस?

नच्छेतर पाजी: भाईसाहब अभी आप एयरपोर्ट पे हो। सौ रुपये की मिनरल वाले पानी की बॉटल है, उस पे सर्विस चार्ज, उसके ऊपर, सर्विस टैक्स, वैट सब मिला के कुल दो सौ चालीस हो गया। और आप क्यों घबराते हो ऑफिस से रीम्बर्स करवा लेना।

रिपोर्टर: पाजी, लेकिन इतना तो कैश होगा नहीं अभी, मेरे पास तो वापिस जाने के लिए दस रुपये हैं, बस का भाड़ा, और डेबिट क्रेडिट कार्ड वगैरह मैं रखता नहीं हूँ। ऑफिस जा के नेट बैंकिंग से पेमेंट करवा देता हूँ, अपनी फाइनेंस टीम से।

नच्छेतर पाजी: अच्छा, चलो कोई नहीं, आपकी जेब में वो पार्कर का पेन है ना गोल्डन वाला, वो रखवा जाओ, अगली बार पेमेंट करके छुड़ा ले जाना।

रिपोर्टर: हद्द है पाजी। आप तो सांस लेने के भी पैसे वसूल लो!

नच्छेतर पाजी: देखो, अब आपके डॉक्यूमेंट चेक नहीं किये ना पानी पिलाने से पहले, एक और किस्सा हो गया। इसलिये ये सब कागज़ी कार्यवाही ज़रूरी है। छाप देना ये भी, लाइव एग्ज़ाम्पल हो जायेगा आपका।

रिपोर्टर: जी ज़रूर!

[पाठकों के लिए नोट: बाद में नच्छेतर सिंह जी को दो सौ चालीस रुपये NEFT करवा दिए गए थे]



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