Tuesday, 24th October, 2017

चलते चलते

'भारी छूट' का पोस्टर लगा रहे दुकानदार से भिड़ा युवक, कहा- "ध्यान भटकता है देखकर"

30, Sep 2017 By Ritesh Sinha

भोपाल. त्यौहारों का मौसम आते ही ऑफर्स की भरमार हो गई है। ऐसे-ऐसे पोस्टर मार्केट में लग गए हैं, जिनको ध्यान से पढ़ लिया जाए तो आदमी एक दिन में ही पागल हो जाए। ‘दस हज़ार का कपड़ा खरीदने पर वाशिंग मशीन मुफ्त*’, ‘4K टीवी खरीदने पर छोटा टीवी फ्री’, जैसे ऑफर्स हर गली और चौक पर छाए हुए हैं। पूरा बाज़ार ऐसे ही ‘भारी छूट’ वाले पोस्टरों से अटा पड़ा है, जिनकी वजह से सौरभ त्रिपाठी नाम के बंदे का कल भारी झगड़ा हो गया।

Heavy Discount
भारी छूट का लाभ लेने के लिये जमा हुए लोग

दरअसल, कल सौरभ अपनी पत्नी के साथ मार्केट घूमने गया था। हालाँकि, सौरभ की पत्नी नीलम भी जॉब करती है, लेकिन वो अपनी सैलरी के पैसों को टच भी नहीं करती। नतीजा यह हुआ कि सौरभ के सारे पैसे शॉपिंग में ही खर्च हो गए। रास्ते में पान लेने के भी पैसे उसके पास नहीं बचे। दोनों बाज़ार से लुट-पिटकर वापस आ ही रहे थे कि रास्ते में एक दुकानदार अपनी दुकान के सामने ‘भारी छूट’ वाला पोस्टर लगा रहा था। यह देखकर नीलम रुक गई और पोस्टर पढ़ने लगी- “गहनों पर आज से मेकिंग चार्जेस फ्री…”

सौरभ पहले से ही उसके खर्चों से परेशान था, गुस्से में उसने दुकानदार को ही भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। “तुम लोगों का क्या है? दूसरों का ध्यान भटकाने के लिए पोस्टर लगा देते हो! पैसे तो हमारे खर्च होते हैं ना!” -सौरभ ने भड़कते हुए कहा। दुकानदार ने सौरभ की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन फिर भी वो नीलम का हाथ पकड़कर बड़बड़ाए ही चला रहा था- “चलो, यहाँ से! जो ऑनलाइन आर्डर किया था, वो भी अभी आना बाकी है! चलो…अब और कुछ नहीं लेंगे!” यह देखकर दुकानदार जाल फेंकते हुए बोला- “ऐ भाई! भाभी जी शायद अपने लिए गहना बनवाना चाहती है! आओ ना दुकान के अन्दर! हम मेकिंग चार्ज भी नहीं ले रहे!”

दुकानदार ने इतना कहा ही था कि सौरभ का गुस्सा फूट पड़ा। “तू चुप रह! तेरे पैसे जाते ना, तब तुझे पता चलता! हम पर क्या बीतती है, कुछ अंदाजा है? घर पहुँचकर टीवी ऑन करो तो उसमें भी दिन भर यही ऑफर-ऑफर चलता रहता है! कुछ दिन चैन से जीने दोगे या नहीं!”

इस तरह इनका झगड़ा आधे घंटे तक चलता रहा। अचानक सौरभ को ख्याल आया कि नीलम कहाँ है? झगड़ने के चक्कर में उसने ध्यान ही नहीं दिया। वो उसे खोजने लगा। तभी उसने देखा कि नीलम उसी दुकान से गले में नेकलेस पहनकर बाहर आ रही है। उसने पूछा- “सारे पैसे तो खर्च हो गए थे, फिर तुम्हारे पास ये नेकलेस खरीदने के पैसे कहाँ से आए?” नीलम ने लापरवाही से चलते-चलते जवाब दिया- “इनके यहाँ उधारी भी चलती है!”



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