Monday, 27th March, 2017
चलते चलते

आज भी कंप्यूटर पर सॉलिटेयर खेलता पाया गया बैंक स्टाफ, नोट जमा कराने वालों ने की धुलाई

10, Nov 2016 By Pagla Ghoda

जबलपुर. नुक्कड़ के डीडीके बैंक के सामने सुबह पौने पांच बजे से ही काफी लंबी लाइन लग चुकी थी, जो कि नथ्थू पनवाड़ी के बगल से होते हुए दूसरे कोने के सुलभ शौचालय तक जा पहुंची थी। आठ बजे जब बैंक खुला तो जहाँ कुछ लोगों को फॉर्म दिए जा रहे थे वहीं कुछ लोगों को समझ ही नही आ रहा था कि पांच सौ के बदले अगर दो हज़ार का नोट दिया जायेगा तो फिर पांच सौ का बंद ही क्यों किया गया।

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मंगल सिंह के काउंटर पर लगी ग्राहकों की भीड़

इसी गुस्से और कन्फ्यूज़न के माहौल के बीच किसी ने बैंक के एक कैशियर मंगल सिंह को कंप्यूटर स्क्रीन पर सॉलिटेयर खेलते देख लिया। फिर क्या था! उसी समय पूरी ब्रांच में हाहाकार मच गया। मंगल को लोगों ने हाथों हाथ उठाकर बैंक से उसी तरह बाहर निकाला, जिस प्रकार रॉक कॉन्सर्ट में लोग रॉकस्टार को भीड़ में ऊपर उठाकर घुमाते हैं। बाहर ले आने पर गुस्साई भीड़ ने मंगल की अच्छे से सिकाई की। जिसके फलस्वरूप उसकी आँख के आस-पास काला धब्बा पड़ गया और उसकी बुशर्ट भी स्कर्ट बन गयी। चूंकि बैंक में स्टाफ पहले से ही कम था तो उसे सिकाई के फ़ौरन बाद वापस अंदर भेज दिया गया, ग्राहकों को निपटाने के लिए।

भीड़ में मौजूद एक ग्राहक सन्देश संदूकची ने बताया, “यार बाहर पूरी लाइन लगी है। सब लोग परेशान हैं। उसके सामने भी कई लोग पैसे जमा करवाने को खड़े थे और वो बोल रहा था कि भाईसाहब सिस्टम स्लो है। सिस्टम-विस्टम कुछ स्लो नहीं होता! ये सब पत्ते खेल रहे होते हैं बैठ के, वो भी कंप्यूटर पे। घोर कलजुग है भाईसाब!”

फिर संदूकची ने सिके हुए मंगल सिंह की और इशारा करते हुए कहा, “पब्लिक ने भी खूब सेवा-सत्कार करने के बाद फिर से उसी कुर्सी पर उसी कंप्यूटर के सामने बैठा दिया। और अब देखो, एक घंटे में पच्चीस लोग निपटा दिए भाईसाब ने! वो कहते हैं ना लातों के भूत बातों से नहीं मानते।”



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