Saturday, 21st October, 2017

चलते चलते

जंगल में एक जड़ी-बूटी को लेकर भिड़ गये बाबा रामदेव और रजनीगंधा वाला बंदा

01, Mar 2017 By बगुला भगत

हिमालय की गोद. पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ बाबा रामदेव और रजनीगंधा पान मसाला के एक मैनेजर के बीच कल जंगल में भयंकर झगड़ा हो गया। झगड़ा एक जड़ी-बूटी के पौधे को लेकर था। बाबा जी अपने दंत कांति के लिये शंखपुष्पी और अश्वगंधा ढूंढ रहे थे। उसी समय रजनीगंधा का मैनेजर बबली भी सुबह-सुबह कत्था ढूंढता हुआ वहां पहुंच गया। जैसे ही बाबा ने अपना हाथ बढ़ाया, बबली ने भी इत्तेफ़ाक़ से उसी समय अपना हाथ बढ़ाया। यानि जड़ी-बूटी पर दोनों के हाथ एक साथ पड़े।

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अपना-अपना माल ढूंढते बाबा जी और रजनीगंधा का बंदा

चूंकि अश्वगंधा का पौधा दुर्लभ होता है और कई महीनों बाद हाथ लगा था, इसलिये दोनों में से कोई भी उसे छोड़ने को तैयार नहीं था। दोनों कहने लगे- “पहले मेरा हाथ पड़ा था”, “पहले मैंने छुआ था।” बाबा ने बबली से कहा- ” मैं यहां सुबह से ऐसी-तैसी करा रहा हूं क्या! तुझे तो कत्था चाहिये ना, फिर अश्वगंधा के पीछे क्यों पड़ा है?” बबली ने भी आंखे दिखाते हुए कहा- “ये कपाल-भाति किसी और को दिखाना बाबा! रणवीर सिंह नहीं हूं मैं! तुम्हारी तरह रोज़ इन्हीं पहाड़ों में घूमता हूं। कुश्ती-कबड्डी…जो लड़ना है आ जाओ!”

और कोई चारा ना देख बाबा ने हरिद्वार आश्रम में फ़ोन कर दिया- “हैलो, बालकिसन! मैं रिसिकेस के जंगल में हूं। पान मसाले वाले के साथ झगड़ा हो गया है, जल्दी आ जाओ!” फ़ोन सुनते ही आचार्य बालकृष्ण 10-15 चेलों को लेकर वहां पहुंच गये। उधर बबली के साथी भी आ गये। वे सब गुटख़े और पान मसाले की पिनक में ‘हाई’ थे। बाबा ने मौक़े की नज़ाकत को समझते हुए कहा- “छोड़ो बालकिसन, इन्हें कल कोर्ट में देख लेंगे!” और वहां से निकल लिये।

देहरादून पहुंचते ही बाबा ने कोर्ट में केस कर दिया। रजनीगंधा (धरमपाल सत्यपाल ग्रुप) के बबली ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा- “जज साब, यूँ ही नहीं मैं रजनीगंधा बन जाता हूं। रोज़ धूप-छाँव की परवाह किये बिना जंगलों में धक्के खाता हूं। और अब गीता की क़सम खाता हूं कि जिसे बाबाजी अश्वगंधा बता रहे हैं, वो लौंग का पौधा है, जो हमारे पान मसाले में पड़ता है। इसलिये उसकी कस्टडी हमें ही मिलनी चाहिये।”

बाबा रामदेव ने कहा- “मेरे प्रभु (माई लॉर्ड का हिन्दी अनुवाद करते हुए) ये इतने साल से मेरे नाम पे इलायची बेच रहे हैं- बाबा इलायची! मैंने आज तक कोई ऑबजेक्शन नहीं किया। लेकिन अब ये कत्था, लौंग और इलायची ढूंढते-ढूंढते हिमाचल से यहां उत्तराखंड में भी आ गये, जिसकी जड़ी-बूटियों पे पहला हक़ इस बाबा का है! तो फ़ैसला इस बाबा के हक में कर दो। करने से होगा। ही…ही…ही!” कहकर बाबा हंसते हुए नाख़ून रगड़ने लगे।

फिलहाल, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अगली सुनवाई फ़र्स्ट अप्रैल की तय कर दी है और सुनवाई के दिन उस पौधे को भी कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।



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